कैदियों पर बेहिसाब खर्च|सुप्रीम कोर्ट जेलों की कराएगा ऑडिट|

राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा जेल में बेहिसाब खर्च पर सुप्रीम कोर्ट ने अचरज जताया है|
विभिन्न राज्यों में इस मद में अलग अलग खर्च से हैरान शीर्ष कोर्ट अब तमाम जेलों की कैग से ऑडिट कराने की तैयारी कर रहा है|सुप्रीम कोर्ट ने गृह मंत्रालय से 31 मार्च तक इसके लिए योजना मांगी है|इसमे पूछा है कि किस तरीके से जेलों के खर्च का ऑडिट कर पता लगाया जा सकता है कि ये पैसा सूझ-बुझ से खर्च किया जा  रहा है या नहीं|कैदियों को लाभ मिल रहा है या नहीं|
बिहार की जेलों में कैदियों की बल्ले-बल्ले|
वर्ष 2015-16 के आकड़ों की माने तो बिहार की जेलों में बंद कैदियों को सबसे ज्यादा ध्यान रखा जाता है|बिहार सरकार एक कैदी पर साल में औसतन 83, 691 रूपये खर्च करती है,जबकि राजस्थान सरकार सिर्फ तीन हजार सालाना खर्च करती है|पंजाब में यह आंकड़ा 16,669 है जबकि नागालेंड में 65,468 रूपये सालाना प्रति कैदी पर खर्च किये जाते है|ये आंकड़े किसी को भी चौकाने के लिए काफी है|
जेलों में स्टाफ की कमी पर चिंता|
सुप्रीम कोर्ट ने जेलों में स्टाफ पर कमी  पर भी चिंता जताते हुए केंद्र,राज्यों व केंद्रशासित प्रदेशों को 31 मार्च तक जेलकर्मियों की भर्ती के कदम उठाने को कहा है|दरअसल सुप्रीम कोर्ट में एमिक्स क्युरी ने 2014 को लोक सभा में रखे गए जवाब का हवाला दिया जिसमे बताया गया था कि 31 दिसम्बर 2014 तक देश में 79,988 जेलकर्मियों के पद स्वीकृत थे,जबकि जेलों में 27 हजार कर्मियों के पद खाली है|

(साभार:-राजस्थान पत्रिका में दिनांक 22/02/2017 को प्रकाशित खबर)