स्वयम्भू जनसेवक V/S लाचार कोटा पुलिस

कुकुरमुत्तों की तरह फैले और देश की हर गली मोहल्लों में अपनी धौस ज़माने वाले गुंडे किस्म के कथित स्वयंभू जनसेवकों का एक दुसाहस पुनः कोटा शहर में देखने को मिला| जहाँ चालान करने जैसे पुलिस के आम कार्यों को लेकर इन कथित स्वयंभू जनसेवकों ने अपने गुर्गों के साथ थाने में घुसकर केवल अपनी धौंस जमाने के लिए वहां तैनात एक सी.आई. को चांटा जड़ दिया|
परिणामस्वरूप पुलिस को अपना रूप दिखाना ही पड़ा|और लाठीचार्ज कर इन अराजकता फैलाने वालों को भगाना पड़ा|

मामला कुछ भी हो,परन्तु जो फोटोज और वीडियों मिडिया में वायरल हो रहे है उनसे स्पष्ट है कि एक सी.आई. को उसी के थाने में थप्पड़ मारा गया है|जिसे देखकर किसी भी आम आदमी का गुस्सा आना जायज है|
इन कथित स्वयंभू जनसेवको का दुसाहस भी इस लिए बढ़ गया क्योकि उनको मालुम है कि राज्य में उनकी सरकार है और येन केन प्रकारेन इस मामले को पार्टी के आम कार्यकर्ताओं से जोड़ कर रफा दफा करवा दिया जाएगा या फिर इन कथित स्वयंभू जनसेवको के समाज के लोग इसे गरिमा का विषय बना लेंगे और सरकार पर दबाव डालने का प्रयास करेंगे|
पुलिस की छवि आम आदमी के बीच चाहे जैसी भी हो इस मामले से एक बात समझ में आती है कि काश्मीर में सैन्य बलों पर पत्थर फैकने वाले अलगाववादियों को भी वहां के स्थानीय कथित स्वयंभू जनसेवक ही शह देते होंगे जिससे उनका मनोबल बढ़ता है|और यदि कोई ठोस कार्यवाही नहीं की जायेगी तो इसी प्रकार की मार पीट हमारे राज्य के अन्य जगहों पर भी होने लगेगी|
राजस्थान पुलिस का ध्येय वाक्य है “आम जन में विश्वास,अपराधियों में डर” यही सही समय है सरकार का यह कर्तव्य है कि इस ध्येय वाक्य को सिद्ध करने के लिए ठोस कार्यवाही करे|

ज्ञानेश कुमार